एक कहानी यह भी है .............
डॉ. लाल रत्नाकर मा.एल. नाथ वैसे कहने को तो समाजवादी था पर वोट हमेशा सांप्रदायिक पार्टी को देता था क्योंकि उस पार्टी का कंडीडेट उसकी विरादरी का होता था, वैसे तो प्रजा और राजा वाला उसका आचरण अच्छा तो नहीं लगता था लेकिन चूँकि वह शिक्षक संगठन का जुगाडू प्रतिनिधि बन बैठा था और सबसे करीबी दिखाता था तो कभी कभार उसकी तरफ भी हो लेने का मन ना होते हुए भी डॉ.बांगड़ू निकल ही जाता था उसके घर की ओर . संयोग था डॉ.बांगड़ू को भी नाइ से बाल ठीक कराने के लिए जाना था जब नाई के यहाँ पहुंचा तो आस पास के झुग्गी के बच्चो की लाईन लगी थी इतने सबेरे इतनी बड़ी बाल कटाने वालों की लाईन देख डॉ.बांगड़ू को कुछ समझ ना आया मोबइल में देखा अभी सात भी नहीं बजे थे, मा. एल. नाथ से मिले भी काफी दिन हो गए थे सो गाड़ी स्टार्ट किया और उसी मोहल्ले में रह रहे तथा कथित समाजवादी मा.एल.नाथ के यहाँ पहुँच गया, प्रदेश के समाजवादी शिक्षक संस्था के महामंत्री, अध्यक्ष और शहर के तथाकथित नेतानुमा एकाध उसके जी हुजूरी करने ...